बंदरो के आतंक से असुरक्षित नगर, जिम्मेदारो के कानो पर नही रेंगती जूँ!

CRS शाहजहाँपुर-महानगर ही नही बल्कि जनपद भर के लगभग सभी क्षेत्रो में बंदरो ने आतंक मचा रखा है! अपनी भूख मिटाने के लिए उजाला होते ही घरो में घुस कर ताकझाक कर मानव जीवन को इस कदर डराते धमकाते और यहाँ तक की पैने दाँतो से कांट कर गंभीर रूप से घायल करने की चर्चा काफी सुर्खियों में रहती है! बीते वर्षो में अनेको बार बंदरो के कारण हुए कई बड़े हादशो में लोगो का छत व जीने से गिर कर हाथ पैर टूट जाने तक की गंभीर घटनाएं घट चुकी है!
घर हो या सरकारी, गैर सरकारी कार्यालय/परिसर, लगभग हर जगह नगर में बंदरो की फौज अब लगभग हर जगह देखने को मिलती है! बंदर अपने आतंक से मानव जीवन के लिए गंभीर खतरा नही बने हुए हैं बल्कि नगर में पड़ी बिजली की जर्रजर लाईनो में झूलने जैसी उद्डता करते हुए जहाँ केबिल काट कर बिजली गुल करने में माहिल तो वहीं वाई फाई की लाईने भी कभी सही दिखाई नही पड़ती साथ कभी कभी बिजली के तारो में उलझ कर उनकी मौत भी हो जाती है!
एतिहासिक नगरी तिलहर अब जैसे बंदर नगरी के नाम से प्रसिद्ध होने लगी है और इसी का फायदा उठा कर दूर दराज से बंदर पकड़ कर तिलहर में छोड़ा जाना काफी चर्चा का विषय बना रहता है जबकि साथ ही उनकी प्रजनन क्रिया भी कम नही ही है! नगर में आए दिन चर्चा का विषय बना बंदरो का आतंक स्थानीय स्तर से लेकर जिले के भी आला अधिकारी से छिपा नही है,लेकिन मानव जीवन के साथ आए दिन लगातार बढ़ती इस गंभीर समस्या से लेकिन इस गंभीर से शासन प्रशासन या स्थानीय स्तर के जन्रतिनिधियों को भी कोई मतलब नही दिखता क्यूंकि उक्त समस्या भले ही गंभीर हो परन्तु जिम्मेदारी जैसे स्वयं की ही रह गई है!
