घटना 14 फरवरी की है, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी असम के दौरे पर थे। इसी दौरान कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने प्रधानमंत्री के नाम पर गुवाहाटी से इंफाल (मणिपुर) के लिए एयर इंडिया एक्सप्रेस का एक टिकट बुक किया।नई दिल्ली: राजनीति में विरोध जताने के तरीके अक्सर चर्चा का विषय बनते हैं, लेकिन हाल ही में कांग्रेस नेता पवन खेड़ा द्वारा अपनाया गया तरीका एक बड़े विवाद में बदल गया। यह मामला न केवल फ्लाइट टिकट कैंसिलेशन तक सीमित रहा, बल्कि इसने मणिपुर हिंसा और सरकारी पारदर्शिता जैसे गंभीर मुद्दों पर भी बहस छेड़ दी है।
क्या है पूरा मामला?
खेड़ा ने इस टिकट की तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा की। उनका उद्देश्य प्रतीकात्मक रूप से पीएम मोदी से मणिपुर का दौरा करने का आग्रह करना था, जो पिछले साल (2023) से जातीय हिंसा की चपेट में है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि प्रधानमंत्री असम में हैं, जो मणिपुर के काफी करीब है, इसलिए उन्हें वहां जाकर स्थिति का जायजा लेना चाहिए।
टिकट कैंसिलेशन पर छिड़ा विवाद
टिकट बुक होने के कुछ ही समय बाद इसे कैंसिल (रद्द) कर दिया गया, जिसके बाद पवन खेड़ा और एयरलाइन के बीच जुबानी जंग शुरू हो गई:
पवन खेड़ा का आरोप: खेड़ा ने दावा किया कि टिकट उनकी जानकारी या अनुमति के बिना रद्द किया गया है। उन्होंने इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और विरोध के अधिकार पर प्रहार बताया।
एयरलाइन का स्पष्टीकरण: एयर इंडिया एक्सप्रेस ने आधिकारिक बयान में कहा कि टिकट उनके ‘सेल्फ-सर्विस’ विकल्प के जरिए रद्द किया गया था। साथ ही, कंपनी ने यात्रियों को अपनी व्यक्तिगत यात्रा जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा न करने की सलाह दी, ताकि सुरक्षा और गोपनीयता बनी रहे।
राजनीतिक गलियारों में हलचल
इस घटना ने मणिपुर की स्थिति को लेकर चल रही राजनीतिक बहस को फिर से केंद्र में ला दिया है। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर मणिपुर मुद्दे पर चुप्पी साधने का आरोप लगा रहा है। वीडियो और चर्चाओं में पीएम केयर्स फंड (PM Cares Fund) की पारदर्शिता को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।