प्राचीन काल से ही गौ माता को देवी सदृश समझा जाता है!

वैज्ञानिक भी इसके गुणों का बख़ान करते हैं!
CRS न्यूज़ एजेंसी से इमरान सागर!
भारत में गाय को माता का दर्जा दिया गया है! गाय एक पालतु पशु भी है हालांकि और भी बहुत पालतू जानवर है, लेकिन उन सबमें गाय का सर्वोच्च स्थान है! प्राचीन काल से ही गौ माता को देवी सदृश समझा जाता है! हर मंगल कार्य में, गाय के ही चीजों का प्रयोग होता है! यहां तक की गाय के उत्सर्जी पदार्थ (गोबर, मूत्र) का भी इस्तेमाल होता है, जिसे पंचगव्य(दूध, दही, घी, गोबर, मूत्र) की उपमा दी गयी है! इन तत्वों का औषधिय महत्व भी है! बहुत सारी दवाईयों के निर्माण में घी और गोमूत्र का इस्तेमाल किया जाता है! इतना सब जानने और समझने के बाद भी इन्हे आखिर पूरी तरह लावारिस छोड़ इनके नाम मात्र पर अनेक कथित व तथाकथित संगठन लाखो की धन कमाई करने में लगे हैं!
गाय की कई प्रजातियां भारत में पाईं जाती है! मुख्य नस्लों में ‘सहिवाल’ जोकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली उत्तर प्रदेश और बिहार के क्षेत्रों में मिलती हैं! ‘गिर’ दक्षिण काठियावाड़ में, ‘थारपारकर’ राजस्थान के जोधपुर, जैसलमेर और कच्छ के इलाकों में, ‘देवनी’ प्रजाति आंध्र प्रदेश और कनार्टक में, ‘नागौरी’ राजस्थान के नागौर जिले में, ‘सीरी’ सिक्किम और दार्जिलिंग के पर्वतीय प्रदेशों में, ‘नीमाड़ी’ मध्य-प्रदेश में, ‘मेवाती’ प्रजाति (हरियाणा), ‘हल्लीकर’ प्रजाति (कर्नाटक), ‘भगनारी’ प्रजाति (पंजाब), ‘कंगायम’ प्रजाति (तमिलनाडु), ‘मालवी’ प्रजाति (मध्यप्रदेश), ‘गावलाव’ प्रजाति (मध्यप्रदेश), ‘वेचूर’ प्रजाति (केरल), ‘कृष्णाबेली’ प्रजाति (महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश) में पाए जाते हैं परन्तु उत्तर प्रदेश में आखिर कौन सी प्रजाति है जिससे प्रेम सिर्फ मीडिया की सुर्खियों तक ही सीमित रहता है!
वैज्ञानिक भी इसके गुणों का बख़ान करते हैं! केवल दूध ही नहीं, इसके दूध से बने अन्य उत्पाद जैसे दही, मक्खन, पनीर, छाछ सभी डेयरी उत्पाद लाभदायक होते है! जहाँ पनीर खाने से प्रोटीन मिलता है, वहीं गाय का घी खाने से ताकत मिलती है! आयुर्वेद में तो इसका बहुत महत्व है! अगर किसी को अनिद्रा की शिकायत हो तो नाक में घी की केवल दो-दो बूंद डालने से यह बिमारी ठीक हो जाती है! साथ ही यदि रात में पैर के तलुओं में घी लगा कर सोया जाय तो बहुत अच्छी नींद आती है! परन्तु हैरत है कि इतना सब होते हुए भी हम उत्तर प्रदेश में जान कर भी इससे पूरी तरह अंजान बने बेरोज़गारी होने का ढ़ोल बजा रहे हैं!
बताया जाता है कि गाय के घृत का धार्मिक महत्व है! इससे हवन-पूजन आदि किया जाता है! और हमारे ऋषि-मुनि जो कुछ भी करते थे, उन सबके पीछे वैज्ञानिक कारण अवश्य होता था! जब गाय का घी और अक्षत (चावल) को हवन कुण्ड में डाला जाता है, तब अग्नि के सम्पर्क में आने पर बहुत सारी महत्वपूर्ण गैसें निकलती है, जो वातावरण के लिए उपयोगी होती हैं! गाय के घी में रेडियोधर्मी गैस को अवशोषित करने की अद्भुत क्षमता होती है! इतना ही नहीं हवन का धुआँ वातावरण को शुद्ध कर देता है! रुसी वैज्ञानिकों के शोध के अनुसार एक चम्मच गाय के घी को आग में डालने से लगभग एक टन ऑक्सिजन का निर्माण होता है! यह काफी हैरतअंगेज बात है!
