एक तो गर्मी की दहशत दूसरा पुलिस का कहर, बाजारो में पसरा सन्नादा!
CRS शाहजहाँपुर-45/46 पारे से जहाँ गर्मी की दहशत से बाजार में ग्राहको का आना बंद है तो सूरज ढ़लने पर मौसम के नर्मी के साथ बाजार आने वाले ग्राहक, अपने वाहनो पर पुलिस का चालान रूपी कहर कैसे बरदास्त कर सकते हैं! पुलिस की इस तीव्र कार्यवाही के चलते मंदी के इस दौर में बाजारो में और भी अधिक सन्नादा पसरता नज़र आने लगा!
अतिक्रमण कर अबैध कब्जो में गुम पटरी पर बनी दुकाने, नगर पालिका, नगर निगन प्रशासन की लापरवाही का खामियाजा, बाजार आने वाले वाहनो को उठाना पड़ रहा है! बाजार से सामान खरीद के लिए दो पहिया वाहन लेकर आना और संकरी पटरी देख यदि स्टेंड की डामर नजर आया तो पुलिस तत्काल ऑनलाईन चालान काट कर भले ही राजस्व बढ़ाने में लगी हो परन्तु आम आदमी की जेब पर मंहगाई के इस दौर में ट्रीपल खर्च जरुर पड़ रहा है जिससे पुलिस के कोई मतलब नही!
सूत्रो की माने तो नियम और कानून को ठेगा अक्सर दिखाती पुलिस को शाम की पैदल गश्त में चालान की कार्यवाही से कई बेहतर है, जागरुकता फैलाना, जन मानस द्वारा नियमो का पालन कराने के लिए सख्ती बरतना परन्तु सीधे तौर पर चालान काट कर आमजन की जेब पर भारी बोझ डालने से लोगो में दहशत का माहोल बनना ठीक नही! पुलिस की दहशत जहाँ अपराध करने वाले अपराधियों में होनी चाहिए तो वही इसके विपरीत एक बार फिर आमआदमी में देखने को मिल रही है!
बताया जाता है कि पूर्व के मुकाबिले फिलहाल पुलिस में काफी बदलाव देखने को मिल रहे हैं! अपराधियों की धरपकड़ में अनेको (पाताल) ऑपरेश काफी सफलता की ओर हैं जिनसे आमजन में पुलिस की बेहतर छवि बनकर उभरी परन्तु यह शाम को होने वाला पैदल मार्च में पुलिस को आम पब्लिक से मित्रता बढ़ाने में अभी और भी अनेक बदलाव करने की जरुरत है!
