काकोरी ट्रेन एक्शन की 100वीं वर्षगांठ पर नूरउलहुदा मदरसे में कविसम्मेलन मुशायरा!



CRS शाहजहांपुर-मदरसा नूरूल हुदा बिजली पूरा में काकोरी ट्रेन एक्शन की सौवीं वर्षगांठ एवं जश्ने आजादी के मौक़े पर मुशायरा कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्र मोहन ‘ज्ञान’ ने, संचालन युवा कवि विकास सोनी ‘ऋतुराज’ने किया! मुशायरा कवि सम्मेलन में स्थानीय कवियों और शायरों ने प्रतिभाग करते हुए देश के अमर बलिदानियों की याद करते हुए अपनी काव्य रचनाओं गीत ग़ज़लों से श्रद्धांजली अर्पित की!
कार्यक्रम का शुभारंभ शाइर क़ासिम अख़्तर वारसी ने नात ए पाक से किया!
वरिष्ठ कवि ज्ञानेन्द्र मोहन ‘ज्ञान’ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत करते हुए कहा-मज़हब क्या होता है तुमको बतला देंगे, तुलसी कबीर नानक गौतम गाँधी जैसे!
कैसे चुकता होता है माँ का कर्ज़ यहाँ, पूछो सुभाष अशफ़ाक़ लाहिड़ी रोशन से! ईसा ने सूली पर चढ़ना स्वीकारा था, कुछ दर्द तुम्हें भी सहना बहुत जरूरी है!
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शायर इशरत सग़ीर ने देशभक्ति का गीत पढ़ते हुए गुनगुनाया-
हार जाती हैं यक़ीनन मुश्किलें इनसान से, चूम कर आकाश लहराये तिरंगा शान से! ख़लीक़ शौक़ ने पढ़ा-सारे जहान में नहीं ऐसा कोई चमन, हिंदोस्तां के जैसा नहीं है कोई वतन!
हसीब चमन शाहजहांपुरी ने यह सुनाया-कितने ख़ुद्दार थे आज़ाद वतन कर के गये,ऐसे दिलदार थे आज़ाद वतन कर के गये!
वरिष्ठ पत्रकार कवि अजय अवस्थी ने अपने गीत से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध किया, उन्होंने पढ़ा
साथ तुम्हारा मिला अगर तो हम कुछ भी कर जाएंगे, होते कैसे सांझ-सवेरे दुनिया को बतलाएंगे!
युवा कवि विकास सोनी ‘ऋतुराज’ने यूं पढ़ा-मैं अंधेरों को मिटाने आ गया हूँ! प्यार के दीपक जलाने आ गया हूँ!
इस तिरंगे से बड़ा कुछ भी नहीं है,
मैं वतन के गीत गाने आ गया हूँ!
शायर फ़ैज़ान आतिफ़ ने कलाम सुनाया-बहुत ही दूर होता जा रहा है, ये मेरा मुल्क क्यों अम्नो अमां से!
शायर क़ासिम अख़्तर वारसी ने इस तरह ख़िराजे अक़ीदत पेश की-जिन के दम से हुआ आज़ाद वतन याद करो, उनकी यादों का शहर दिल में भी आबाद करो!
इस मौके पर सैयद शारिक अली, इजहार हसन, मोहम्मद जाहिद, शारिक अली खान, साजिद अली खान, ममनून खान, मोईन खान, मुख़्तार अहमद, हैदर अली, ज़हूर ख़ान, इमरान सईद ख़ान, अब्दुल लतीफ, शाहनवाज हुसैन आदि उपस्थित रहे! आभार प्रधानाचार्य इक़बाल हुसैन फूल मियां ने व्यक्त किया!
