पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की भूमिका अहम-रमेश भैया!
तंबाकू से पर्यावरण को बड़ा ख़तरा-रमेश भैया
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर आयोजित हुआ पंचतत्व संरक्षण सेमिनार!
CRS शाहजहाँपुर-विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर पर्यावरण बचाने के लिए आयोजित पंचतत्व संरक्षण सेमिनार का आयोजन किया गया!आयोजन को संबोधित करते हुए धारा पर्यावरण बचाओ अभियान के संरक्षक, समाजसेवी पर्यावरणविद रमेश भैया ने कहा कि ,”विनोबा सेवा आश्रम ने 5 वर्ष पूर्व लखनऊ को तंबाकू मुक्त बनाने का संकल्प लिया था और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक के समय लखनऊ को विश्व का पहला तंबाकू मुक्त शहर घोषित कर एक नजीर पेश की!
विश्व तंबाकू निषेध दिवस पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि ,”दुनिया में 600 अरब पेड़ तंबाकू और सिगरेट के लिए प्रतिवर्ष काट दिए जाते हैं!
जिससे 84 अरब टन कार्बन डाइऑक्साइड उनसे निकलती है जो पर्यावरण के लिए बहुत ही घातक है!
500 करोड़ टन तंबाकू से प्रतिवर्ष 8 करोड मौतें होती हैं! उन्होंने कहा कि “पर्यावरण संरक्षण में महिलाओं की अहम भूमिका है! महिलाएं अपने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए तो प्रेरित करती ही हैं साथ ही अपने हर्बल गार्डन में लौकी तोरई आदि लगाकर भी पर्यावरण संरक्षण करती हैं! उन्होंने कहा कि, “मैंने प्रयास करके सहजन और मीठे नीम के बहुत पौधे लगवाये हैं! पालक लौकी सहजन के पौधे महिलाओं के माध्यम से घर-घर में रोपित कराए हैं! इसके साथ ही दीर्घजीवी वृक्षों का रोपण भी महिलाओं से कराया है!
धारा पर्यावरण बचाओ अभियान के प्रांतीय प्रमुख और एसएस कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अनुराग अग्रवाल ने कहा कि,” पर्यावरण संरक्षण के लिए एसएस कॉलेज के विद्यार्थी पेड़ पौधों से कॉलेज परिसर को हरा-भरा बनाकर एक नजीर पेश कर चुके हैं! उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण में तालाबों की भूमिका भी अहम है! अधिकांश तालाब या तो पाट दिए गए हैं या किसी के कब्जे में हैं! ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले विद्यार्थियों से ऐसे तालाबों का सर्वेक्षण कराकर प्रशासन के सहयोग से उन्हें कब्जा मुक्त कराया जाएगा! जिससे वर्षा जल का संरक्षण आसानी से किया जा सके! क्योंकि वर्तमान में गिरता हुआ भूजल स्तर बहुत ही चिंता का विषय है! उन्होंने यह भी कहा कि जल की बर्बादी पर्यावरण की बर्बादी है! विद्यार्थियों की टोलियां बनाकर ऐसे स्थानों का विशेष ध्यान रखा जाता है जहां पर नल की टोटियाँ खुली रहती हैं! उन्हें तत्काल बंद कर, जल की बर्बादी रोकी जा रही है!
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पर्यावरण बचाओ अभियान के राष्ट्रीय प्रभारी सुप्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक और पर्यावरणविद् डॉक्टर महेश चंद्र सक्सेना ने कहा कि “पेड़ पौधों में भी जान होती है! जब भी आप छुई-मुई के पौधे को छूते हैं तो उसकी पत्तियां सिकुड़ जाती हैं! प्राचीन काल में पेड़ पौधों को धर्म के साथ जोड़कर उनका संरक्षण और संवर्धन किया जाता था, जिससे हमारा पर्यावरण सुरक्षित रह सके! पेड़ पौधों के संरक्षण के लिए प्रचार प्रसार के साथ ही कार्य का मूल्यांकन भी अति आवश्यक है! पौधे लगाने से अधिक पौधों के संरक्षण पर ध्यान दिया जाना चाहिए! किसान लोग बहुत ही गुणवान होते हैं, वे अनुभव के आधार पर चीटियों और वृक्षो की पंक्तियां देख कर के मौसम का अनुमान लगा लेते हैं कि बारिश होने वाली है!
वरिष्ठ स्तंभकार अमित त्यागी ने कहा कि खेतों में अधिकाधिक रासायनिक प्रयोग से केंचुए समाप्त हो रहे हैं,
जिससे भूमि के अंदर जल शोषित नहीं हो पा रहा है, इसलिए जलस्तर काफी नीचे जा रहा है! इसके लिए पौराणिक तालाबों का संरक्षण अति आवश्यक है, जिससे पर्यावरण को बचाया जा सके! हम अपनी जरूरतों को सीमित रखें कागज का दुरुपयोग करने का मतलब है कि पौधों की जान लेना! अतः प्लास्टिक कचरे से समाज को मुक्त बनाना होगा! लोक भारती के राष्ट्रीय पदाधिकारी कुमार नीरज सिंह ने कहा कि केवल पेड़ पौधे लगाने से कुछ नहीं होने वाला!
पंचतत्वों का संरक्षण अति आवश्यक है! 5 जून से चलने वाला विश्व पर्यावरण दिवस हमारे देश के अनुकूल नहीं है! यह अभियान रक्षाबंधन से भारत में आयोजित होना चाहिए जब बारिश का मौसम अच्छी तरह से शुरू हो जाए! जल इकाइयों के किनारे सघन वृक्ष लगाकर पर्यावरण का संरक्षण आसानी से किया जा सकता है!
जिसके लिए तालाब और नदियों के तट नंगे न रहें! ध्यान रहे कि गांव में जहां तालाब हैं बारिश का पानी तालाब तक पहुंचने का प्रबंध किया जाए और जहां पर तालाब नहीं है वहां छोटे छोटे गड्ढे खोदकर भी भूजल को रिचार्ज किया जा सकता है!
इस अवसर पर कर्नाटक के प्रदेश संयोजक डॉक्टर सुनील परीट ने कहा कि स्कूलों में बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता है! जिससे उनमें पर्यावरण के संरक्षण के प्रति रुचि उत्पन्न हो सके! शिक्षिका और पर्यावरण प्रेमी पल्लवी वर्मा ने कहा कि,” हम अपने विद्यालय के बच्चों के माध्यम से पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण के लिए संकल्पित है! मुरादाबाद की पर्यावरणविद और पर्यावरण बचाओ अभियान की प्रदेश संयोजक डॉ स्वदेश सिंह ने कहा कि,” घर में आने वाले फलों के बीज से पौधे तैयार किए जा सकते हैं और उनके बीजों को मिट्टी और कंपोस्ट खाद के मिश्रण से गोलियां बनाकर निर्जन स्थानों पर उन्हें फेंककर पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा सकता है, जिससे पर्यावरण बचाया जा सकता है!
जेंटलमैन साइकिल क्लब के संस्थापक सदस्य डॉक्टर सुबोध बाजपाई ने कहा कि,” पर्यावरण बचाने के लिए हम सब को एक साथ आगे आना होगा! इस अवसर पर महाराष्ट्र के प्रदेश संयोजक और मिसेज इंडिया 2022 के रनर अप रही डॉ रश्मि शर्मा “निक्की” ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण अति आवश्यक है! मुंबई दिल्ली जैसे मेट्रोपॉलिटन सिटीज में भी जनजागरण अभियान चलाकर पर्यावरण संरक्षण किया जा सकता है। चाहे भले ही गमले में औषधीय पौधों को लगाया जाए! उन्होंने कहा कि किसी भी शुभ अवसर पर उपहार के रूप में पौधे देकर एक अच्छी पहल की जा सकती है।
जिसे हमारे नेतृत्व में बहुत ही सराहनीय मिली है! इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सोशल मीडिया प्रमुख और पर्यावरण प्रेमी रवि सूर्या अंकुर सिंह आदि ने भी अपने विचार रखे! डिजिटल माध्यम से आयोजित पंचतत्व संरक्षण सेमिनार के अंत में पर्यावरण बचाओ अभियान के राष्ट्रीय संयोजक प्रदीप वैरागी ने सभी का आभार व्यक्त किया!
