बम्बा (नहर/नाला) से नाला और अब नाली जैसा लेकिन आखिर किसने दबाई नाले की भूमि!


CRS तिलहर/शाहजहाँपुर-पक्के तालाब से नहर रूपी एक नाला, (खड्डी वाली पुलिया) लालपुल कम्हारो वाली पुलिया से होता हुआ उम्मरपुर नई बस्ती के बीच से नटबीर बाबा की पुलिया (बतलैया सोसायटी) से गुजर कर कष्ठारिया की पुलिया से होता हुआ हाईवे किनारे और फिर हाईवे के नीचे से निकल कर चीनी मिल जहाँ गन्न तुलाई होती है से, भख्सी नाले में गिरता है!
इस नाले की प्राचीन चौड़ाई, बाकी बचे (नवनिर्माण को छोड़ कर) को देख कर अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि उक्त नाला लगभग 15 वर्ष पहले कितना चौड़ा रहा होगा जिससे बारिश में कभी नगर में जलभराव नही हो सका परन्तु वर्तमान में लगभग हर बरसात में नगर की जलभराव समस्या सबकी नज़र में है!
एसा शायद इस लिए कि नाले का आधा अधूरा नवनिर्माण, एक ऐसे मानक में कराया जिससे उसकी चौड़ाई आधे से भी बहुत कम रह गई और इसके विपरीत नगर की आवादी लगभग दो गुनी हो चुकी है जिसमे पानी का खर्च आम दिनो में बढ़ गई तो समझें कि बरसास मे क्या होता होगा!
कहने का मतलब यह है कि नाले की बाकी की सारी चौड़ाई की भूमि ज़मी खा गई या आसमाँ…? उक्त यह भी कहना गलत होगा क्यूंकि भूमि को जमी से अलग करना नामुमकिन है! नाला निर्माण के समय अपनी अपनी जिम्मेदारियों को सही से निभाया गया होता तो अबैध अतिक्रमण कर निर्माण न हुआ होता! दूसरी सबसे अहम बात यह भी हो सकती है कि फिर हाल तिलहर नगर के इतिहास मे 52 फिट चौड़ा कोई नाला रहा ही नही क्यूंकि एक मात्र उक्त नगर के बीच कहा जा सकता है जो अब बीरिश के दिनो में आधे नगर के लिए सिर दर्द बन जाता है!
