
वित्तविहीन विद्यालय के प्रधानाचार्यो को केंद्र व्यवस्थापक पद से हटाए जाने से आक्रोशित शिक्षक महासभा ने शासन से अपने आदेश को वापस लेने को दिया ज्ञापन।
रायबरेली—–आज दिनांक 05-04-2022 को संत कंवरराम इंटर कालेज रायबरेली में माध्यमिक वित्तविहीन शिक्षक महासभा की आवश्यक बैठक संगठन के संरक्षक रामानंद शुक्ला की अध्यक्षता में संपन्न हुई जिसमे शासन द्वारा प्रदेश के वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को केंद्र व्यवस्थापक के पद से हटाए जाने की शासन के तुगलकी फरमान की तीव्र निंदा की गई तथा आक्रोशित शिक्षको ने जिला विद्यालय निरीक्षक के माध्यम से शासन को प्रेषित ज्ञापन देकर इस भेदभावपूर्ण व अपमानजनक आदेश को वापस लेने का निवेदन किया। जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र तिवारी ने कहा कि वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को केंद्र व्यवस्थापक के पद से हटाकर सहायक केंद्र व्यवस्थापक बनाना बोर्ड परीक्षा नियमावली के विरुद्ध तो है ही साथ ही संविधान की समानता के सिद्धांतों के भी विपरीत है। शासन का यह तुगलकी फरमान वित्तविहीन विद्यालयों की गरिमा को गिराना है। शासन के इस भेदभावपूर्ण व अपमानजनक आदेश से प्रदेश के समस्त प्रधानाचार्य व शिक्षक समुदाय आहत है। वित्तविहीन विद्यालयों के साथ शासन द्वारा अपनाए जा रहे इस दोहरे रवैए से उनमें जबरजस्त आक्रोश व्याप्त है। जिलाध्यक्ष ने शासन से प्रश्न किया कि पूर्व सरकार द्वारा वित्तविहीन शिक्षकों के जीवनयापन हेतु जो मानदेय की व्यवस्था प्रारंभ की गई थी उसे भाजपा सरकार ने यह कहकर बंद कर दिया था कि इस आदेश मे "भविष्य में इसे दृष्टांत नही माना जाएगा" लिखा है। जबकि शासनादेश के विपरीत जाकर वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यो को केंद्र व्यवस्थापक से हटाकर प्रदेश सरकार वर्ष 2011 में वर्तमान शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी जी एवम अन्य शिक्षक नेताओं के प्रयास वित्त विहीन विद्यालय के प्रधानाचार्यो को केंद्र व्यवस्थापक बनाने के संबंध में निर्गत शासनादेश की धज्जियाँ उड़ा रही है। उन्होंने शासन को आगाह करते हुए चेतावनी दी कि यदि इस तुगलकी फरमान को वापस न लिया गया, और वित्तविहीन शिक्षकों के भरण पोषण हेतु सम्मानजनक मानदेय की व्यवस्था न की गई व सेवा नियमावली न निर्गत की गई तो संगठन प्रदेश व्यापी आंदोलन को विवश होगा जिसकी समस्त जिम्मेदारी शासन की होगी। जिला कोषाध्यक्ष अरुण प्रताप सिंह चौहान ने कहा कि यदि शासन को वित्तविहीन विद्यालयों पर विश्वास नहीं है तो इन विद्यालयों को परीक्षा केंद्र बनाती ही क्यों है। बलिया की एक घटना के कारण पूरे प्रदेश को सजा देना पूरे वित्तविहीन शिक्षक समाज का अपमान है। शासन को यदि केंद्र व्यवस्थापको को हटाना ही है तो ये नियम सिर्फ वित्तविहीन विद्यालयों पर नही बल्कि सभी विद्यालयों पर लागू करना चाहिए। वित्तविहीन विद्यालयों के साथ शासन का दोहरा व सौतेला व्यवहार बिलकुल ही अक्षम्य है। इस अवसर पर लखनऊ खंड के शिक्षक विधायक उमेश द्विवेदी ने टेलीफोनिक व्यवस्था के माध्यम से शिक्षको को संबोधित करते हुए शासन के इस आदेश को वित्तविहीन विद्यालयों के प्रधानाचार्यो व शिक्षको के सम्मान पर कुठाराघात बताया तथा उपस्थित शिक्षक समुदाय को आश्वस्त करते हुए कहा कि शिक्षको व प्रधानाचार्यो के सम्मान से किसी भी तरह का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने माननीय मुख्यमंत्री व शिक्षामंत्री से मिलकर इस भेदभावपूर्ण आदेश को वापस कराने का आश्वासन दिया। इस अवसर पर जिला महासचिव श्रीकांत तिवारी, प्रबंधक अजय त्रिपाठी, प्रबंधक चंद्र प्रकाश पांडेय,मनोज श्रीवास्तव, जिला उपाध्यक्ष विनय प्रताप सिंह, आनंद श्रीवास्तव, सत्येंद्र शुक्ला, योगिता सिंह, ऋषिराज त्रिपाठी, कपींद्र सिंह, राजेन्द्र वर्मा, अमित सिंह, कृष्ण कुमार सिंह, आनंद त्रिपाठी, कामद मिश्रा, अशोक कुमार द्विवेदी, सत्य प्रकाश शर्मा, सौरभ द्विवेदी, सौरभ शुक्ला, सहित अनेकों शिक्षक, प्रधानाचार्य एवम प्रबंधक उपस्थित थे।।
