
बदायूँ ज़िले के सहसवान में एसडीएम और तहसीलदार न्यायालय के खिलाफ अधिवक्ताओं का बहिष्कार पन्द्रहवें दिन भी जारी रहा।इस दौरान अधिवक्ताओं ने कचहरी कैंपस में बैठक कर अग्रिम रणनीति पर विचार किया। अधिवक्ताओं ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पास कर कहा कि प्रशासन अपनी हठधर्मिता पर अडा हुआ है अधिवक्ताओं की समस्याओं के निस्तारण में कोई रुचि नहीं ले रहा है। जिस कारण से स्थिति विस्फोटक होती जा रही है।अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से एसडीएम और तहसीलदार की शिकायत की थी। जिस पर ज़िलाधिकारी ने अपर ज़िलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य (राजस्व) को जांच अधिकारी नियुक्त कर सहसवान भेजा। इस संदर्भ में अपर जिलाधिकारी का एक पत्र बार एसोसिएशन व सेंट्रल बार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्षों के नाम प्राप्त हुआ जिसमें अवगत कराया गया था कि आपकी शिकायत का संदर्भ ग्रहण करते हुए जिलाधिकारी ने मुझे जांच अधिकारी नियुक्त किया है। आप शिकायत में उल्लेखित कतिपय बिंदुओं के संदर्भ में अपना पक्ष रखने हेतु दोपहर एक बजे एसडीएम कार्यालय में उपस्थित हो। अपर
ज़िलाधिकारी के पत्र प्राप्त होने के बाद अधिवक्ताओं ने उनसे फोन पर कहा की हम लोगों ने जिनकी शिकायत की है आप हमें उनके कार्यालय में ही बुला रहे हैं आप जांच अधिकारी हैं। हमारे बार एसोसिएशन के भवन में सादर आकर हम लोगों से हमारा पक्ष ले सकते हैं। जिस पर अपर जिलाधिकारी संतोष कुमार वैश्य ने अधिवक्ताओं से कहा कि आप लोग तहसील के सभागार में आ जाएं। जिसका विरोध करते हुए अधिवक्ताओं ने तहसील सभागार में जाने से स्पष्ट मना कर दिया। उसके बाद अपर जिलाधिकारी ने एसडीएम के पेशकार आशू सक्सेना से फोन पर सूचित करवाया। कि आप लोग दोनों अध्यक्षों को एसडीएम कार्यालय भेज दें। और अपर जिलाधिकारी को बुलाकर अपने साथ बार एसोसिएशन के भवन में ले जाऐ। जिस पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रवींद्रनारायण सक्सेना और सेंट्रल बार वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष जावेद इकबाल नकवी अपर जिलाधिकारी को बुलाने एसडीएम कार्यालय गए।मगर वह उनके साथ नहीं आए। अधिवक्ता गण बार एसोसिएशन के भवन में बैठे अपर जिलाधिकारी के आने का घंटों इंतजार करते रहे मगर वह अधिवक्ताओं का पक्ष सुनने बार भवन नहीं पहुंचे। और अधिवक्ताओं का बिना पक्ष सुने ही जिला मुख्यालय वापस लौट गए।
