बज़्म-ए-गुलशन-ए-मुख्तार शायर संस्थन गणतंत्र दिवस पर धूम!
CRS तिलहर/शाहजहाँपुर-कल शाम गणतंत्र दिवस के मौके पर बज़्म गुलशन-ए-मुख्तार की जानिब से शायर उवैस खां शिफ़ा की रिहाइश गाह पर एक शेरी नाशिस्त का ऐहतिमाम किया गया जिसकी सदारत उस्ताद शायर रहमत तिलहरी ने की और निजामत वाजिद हुसैन वाजिद ने की प्रोग्राम का आग़ाज़ बुजुर्ग शायर मसूद हसन खां ने नाते पाक पढ़कर किया। रहमत तिलहरी ने अपना कलाम पढ़ते हुए वतन को चमन बताया और आज की सियासत पर अफसोस करते हुए कहा-खूबसूरत है रहमत यह अपना चमन
दुश्मनों की खुराफात क्या कीजिए!
और फिर जर्रार तिलहरी ने कहा-
चले हम लोग लेकर अपने अपने खूं का नजराना, हमें जिस वक्त भी भारत की धरती ने पुकारा है!
इसी के साथ बज़्म-ए-अरबाबे सुखन के जरनल सेक्रेटरी शमशाद हुसैन “आतिफ” ने कहा
कुछ इबादत में लाशऊरी है,
चोट खाना बहुत जरूरी है!
शायर वाजिद हुसैन वाजिद ने कहा
तुझपे मर मिटने की हसरत दिल में रहती है सदा, तू है दीपक और हम हैं तेरे परवाने वतन! शायर उवैस खां शिफा ने कहा-हम मुसलमान हैं पाबंदे शरीयत लेकिन, हमको क़ानूने वतन जान से बढ़कर है अज़ीज़!
बज्म में अकरम तिलहरी ने कहा-
कोई पक्का नहीं जुबान का है,
हाल कैसा तेरे जहान का है
डॉक्टर रेहान ताबिश ने कहा,
निकालूं किस तरह अब दिल से उसको, इजाजत लेके वह अंदर गया है!
नौ उम्र शायर आज़म तिलहरी ने कहा-आपके क़ौल में सदाकत है
मुस्कुराना भी इक इबादत है! शायर हसन तिलहरी ने कहा
वतन की ख़ाक को पांचो पहर माथे से मलते हैं, समझ लीजे वतन से हम मोहब्बत कितनी करते हैं!
इनके अलावा वक़ार हातिमी, अज़ीम अख्तर, शोईद खै़रपुरी, सरताज शाहजहांपुरी, खालिद अल्लाहगंजवी ने भी अपने-अपने कलाम पेश कर वाह वाही लूटी आखिर में साहिबे ख़ाना उवैस खां शिफ़ा ने मरहूम चेयर मैन इमरान खां को खिराजे अक़ीदत पेश करते हुए उनके लिए मग़फ़िरत की दुआ और तमाम शोअरा का शुक्रिया अदा किया!
