जिला गन्ना अधिकारी ने बताया है कि बसंत कालीन गन्ना बुवाई का उत्तम समय 15 फरवरी से 31 मार्च है। कृषक इस अवधि में गन्ने की बुवाई करें, क्योंकि गन्ने की बुवाई हेतु 20 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान हितकर होता है। गन्ना बुवाई से पूर्व दीमक जड़ भेदक आदि कीटों से रक्षा हेतु भूमि उपचार सिन्जेन, फोरेट 10 जी 25 कि0ग्रा0 प्रति हेक्टेयर की दर से अथवा बुवाई के उपरान्त क्लोरोपायरीफॉस 5 ली0प्रति हेक्टेयर की दर से घोल बना कर हजारे/नैपसेक से नाली में छिड़काव करना चाहिए। प्रलेख प्रजातियों के लिखे कोशो 13235, को0 98014, को0 15023 को लाख, 94184 को0 0118, को लख, 14201, को0शा0 13231 इत्यादि की ही बुवाई करें। बुवाई हेतु गन्ने के टुकड़ों को उपचारित अवश्य करें कृषक भाइयों से अनुरोध है कि प्रजातीय संतुलन बनाये रखें।
कृषक खेत में मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई करें और पाटा लगाने से पहले 10-15 टन कम्पोस्ट या गोबर की खाद डालकर हैरो से दो जुताई कर लें। उन्नतिशील प्रजातियां विभागीय आधार एवं प्राथमिक पौधशालाओं में उपलब्ध हैं, इसके अतिरिक्त कृषक प्रक्षेत्र में भी उपलब्ध हैं। नई प्रजातियों का गन्ना बीज शोध केन्द्र शाहजहांपुर व अन्य शोध केंद्रों से दिया जायेगा उसकी सीधे विभागीय पोर्टल से बुकिंग की जा सकती है। ट्रेंच विधि बुवाई से अधिक पैदावार प्राप्त होती है अतः ट्रेंच विधि से अधिकतम बुवाई करें तथा गन्ने के साथ-साथ उड़द, भिन्डी, प्याज, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूजा आदि फसलों की बुवाई की जा सकती है जिससे दोहरा लाभ के साथ ही भूमि की उर्वरा शक्ति भी बढ़ती है। गन्ने के बुवाई हेतु एक एवं दो आँख के टुकड़े को किसी फफूँदनाशक या कीटनाशक से उपचारित करने के उपरान्त ही बुवाई करनी चाहिए जैसे 200 ग्राम बावस्टीन प्रति हेक्टेयर के लिए 100 लीटर पानी में घोलकर टुकड़ों को 30 मिनट तक उपचारित करें।
